महासमुंद। प्रदेश में धान खरीदी प्रक्रिया में चल रही अव्यवस्था और टोकन सिस्टम की धीमी प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड के ग्राम सेनभांठा में धान बेचने के लिए टोकन नहीं मिलने से परेशान 65 वर्षीय किसान मनबोध गांड़ा ने शनिवार सुबह ब्लेड से अपना गला काटने का प्रयास किया। घटना के वक्त किसान सुबह मवेशियों को चराने गया था।
गंभीर स्थिति में उसे पहले बागबाहरा समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, इसके बाद हालत नाजुक होने पर रायपुर के आंबेडकर अस्पताल रेफर किया गया है। डॉक्टरों के अनुसार किसान की श्वास नली कट गई है और उसकी स्थिति गम्भीर बनी हुई है।
परिवार का आरोप – टोकन कटवाने की दौड़ और मोबाइल समस्या ने बढ़ाया तनाव
किसान के पुत्र शंकर गांड़ा ने बताया कि उनके पिता पिछले तीन दिनों से लगातार च्वाइस सेंटर और सोसायटी के चक्कर लगा रहे थे, लेकिन धान बेचने के लिए 50 कट्टा का ऑनलाइन टोकन नहीं कट पा रहा था। मोबाइल नंबर में तकनीकी दिक्कत आने के कारण भी सिस्टम बार-बार रिजेक्ट दिखा रहा था।
परिवार का कहना है कि लगातार टोकन नहीं मिलने के कारण किसान मानसिक रूप से अत्यधिक दबाव में था, साथ ही अप्रैल माह में बेटी की शादी तय होने से आर्थिक तनाव भी बढ़ गया था।
प्रशासन और परिवार के दावे अलग
परिवार का दावा: किसान पहले सोसायटी पहुंचा था, लेकिन कर्मचारियों ने उसे च्वाइस सेंटर भेज दिया।
सोसायटी प्रबंधन का दावा: मनबोध या उनके परिजन सोसायटी आए ही नहीं।
सोसायटी के शाखा प्रबंधक मुनगासेर ने कहा कि रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज की जांच कर सच्चाई स्पष्ट की जा सकती है।
कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश
महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने कहा—
“प्रथम दृष्टया किसान सोसायटी नहीं पहुंचा था, वह अन्य माध्यमों से टोकन कटवाने की कोशिश कर रहा था। मामले की जांच कराई जा रही है।”
ग्रामीण व्यवस्था पर उठे सवाल, किसान बोले– सिस्टम ने तोड़ दिया मनोबल
ग्रामीणों का कहना है कि धान खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था चरम पर है। किसान सुबह से शाम तक लाइन में लगते हैं, फिर भी ऑनलाइन सिस्टम और च्वाइस सेंटर की धीमी प्रक्रिया के कारण टोकन नहीं कट पा रहे।
एक किसान ने कड़ा सवाल उठाया—
“अगर सरकार चाहती है तो टोकन खत्म कर खरीदी करे। किसान अब सिस्टम से लड़ने में अपनी जान गंवा रहे हैं।”
सरकार और प्रशासन पर बना दबाव
घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश है और किसान संगठनों ने इसको धान खरीदी व्यवस्था की बड़ी लापरवाही बताया है। अब सबकी नजर प्रशासनिक जांच और किसान की सेहत पर टिकी है।

