दुर्ग पुलिस ने महादेव ऐप सट्टा नेटवर्क से जुड़े 3,000 संदिग्ध लोगों की एक सूची तैयार की है। इनमें स्थानीय नेता, सरकारी अफसर, कर्मचारी और कुछ पत्रकार भी शामिल बताए जा रहे हैं।
अब तक 70 एफआईआर दर्ज की गई हैं और 300 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है — जिनमें नेटवर्क के ठेकादार, एजेंट और सट्टा खिलाने वाले शामिल हैं।
जांच का दायरा और जुड़ी एजेंसियाँ
मामला अब सिर्फ पुलिस तक सीमित नहीं रहा; इसमें सीबीआई और ईडी (Enforcement Directorate) भी सक्रिय हो चुकी हैं।
ईडी के मुताबिक, मुख्य संचालक में से एक सौरभ चंद्राकर को दुबई से हिरासत में लिया गया है।
संचालकों द्वारा भेजे गए पैसों की ट्रांसफर प्रणाली — हवाला, फर्जी बैंक खाते, डिजिटल वॉलेट — की भी गहन जांच की जा रही है।
सट्टा-धन का पैमाना और मनी-लॉन्ड्रिंग का आरोप
जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस सट्टा नेटवर्क से जुड़े अनलाइन और हवाला लेन-देन के माध्यम से करोड़ों रुपये की हेराफेरी हुई। इसका अनुमानित काला धन अरबों रुपए में बताया गया है।
फर्जी बैंक खाते और सिम कार्ड, डिजिटल वॉलेट आदि के ज़रिए पैसे की आवाजाही की गई — ताकि वास्तविक स्रोत छुपाया जा सके।
राजनीतिक व प्रशासनिक रसूख के आरोप
जांच में यह पाया गया है कि मामले में सिर्फ आम सटोरिए या एजेंट ही नहीं, बल्कि राजनीति व प्रशासन से जुड़े नाम भी शामिल हो सकते हैं। पुलिस–ब्यूरोक्रेसी–राजनीति का alleged नेटवर्क सामने आया है।
इस कारण, अब सीबीआई द्वारा बड़े स्तर पर पूछताछ और दस्तावेजी मामलों की समीक्षा की जा रही है — ताकि पैसों के स्त्रोत, फ्लो और नेटवर्क संरचना का भली-भांति पता चल सके।
आगे की क्या कार्रवाई हो सकती है?
पुलिस–एजेंसियाँ कह रही हैं कि प्राथमिक छापेमारी से भी बड़ी कार्रवाई की तैयारी है — जिसमें और गिरफ्तारी, संपत्ति जब्ती, बैंक खाते फ्रीज़ करना और आर्थिक अपराध की कठोर कार्यवाही शामिल हो सकती है।
अगर आरोप साबित हुए, तो यह मामला सिर्फ सट्टा नहीं रहेगा — बल्कि मनी-लॉन्ड्रिंग, भ्रष्टाचार और शायद राजनैतिक वित्तपोषण की कड़ी जांच का विषय बनेगा।

