सरगुजा संभाग में दिसंबर की शुरुआत से ही कड़ाके की ठंड का असर देखने को मिल रहा है। लगातार गिरते तापमान के कारण अंबिकापुर सहित पूरे इलाके में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, जो सामान्य से करीब 4.5 डिग्री कम है। शीतलहर के चलते आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों, दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों और सड़क किनारे दुकान लगाने वाले लोगों को हो रही है। सुबह-शाम ठंड इतनी तेज है कि लोग अलाव का सहारा लेने को मजबूर हैं। मेहनत-मजदूरी कर जीवन यापन करने वालों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ के ‘शिमला’ कहे जाने वाले मैनपाट में सर्दी पर्यटकों के लिए आकर्षण बन गई है। ठंड के मौसम का आनंद लेने बड़ी संख्या में सैलानी मैनपाट पहुंच रहे हैं। रिसॉर्ट और होम-स्टे पूरी तरह भरे हुए हैं। सुबह खेतों में ओस की बूंदें बर्फ की सफेद चादर जैसी नजर आ रही हैं, जिसे देखने और कैमरे में कैद करने पर्यटक उत्साहित हैं।
मौसम विज्ञानी ए.एम. भट्ट के अनुसार, पिछले 7–8 दिनों से उत्तर-पश्चिमी शुष्क हवाओं के कारण क्षेत्र में शीतलहर की स्थिति बनी हुई है। ड्राय एयर फ्लो की वजह से पठारी और खुले इलाकों में ठंड का असर ज्यादा महसूस किया जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में सुबह के समय ओस की बूंदें जमकर ठोस रूप ले लेती हैं, जिससे ठिठुरन और बढ़ जाती है।
मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल राहत के आसार कम हैं और आने वाले दिनों में ठंड का असर इसी तरह बना रह सकता है।
