
अगर मन में बदलने की सच्ची चाह हो, तो जिंदगी की दिशा भी बदली जा सकती है। कभी जिन हाथों में बंदूक थी, आज वही हाथ हुनर सीखकर अपने भविष्य को संवार रहे हैं। राज्य सरकार की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण कर चुके माओवादियों को अब सम्मानजनक जीवन की ओर बढ़ाया जा रहा है।
ग्राम चौगेल (मुल्ला) स्थित कैंप में 40 आत्मसमर्पित युवक-युवतियों को ड्राइविंग, सिलाई, काष्ठशिल्प, सहायक इलेक्ट्रिशियन जैसे विभिन्न व्यावसायिक प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में लौटकर आत्मनिर्भर बन सकें।
हिंसा से हुनर की ओर सफर
वर्षों तक हिंसा और भय के माहौल से जूझता रहा बस्तर अब शांति, विकास और विश्वास की राह पर आगे बढ़ रहा है। हथियार छोड़कर भविष्य गढ़ने का फैसला करने वाले इन युवाओं के लिए चौगेल कैंप आज एक ‘कौशलगढ़’ बन चुका है। यहां उन्हें न केवल तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है, बल्कि कक्षा पहली से आठवीं तक की शिक्षा भी दी जा रही है, जिससे वे अपने अधूरे सपनों को पूरा कर सकें।
20-20 के बैच में चल रहे इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सभी आत्मसमर्पित माओवादी पूरे उत्साह और लगन के साथ भाग ले रहे हैं।
“अब सपने पूरे हो रहे हैं” — मनहेर तारम
40 वर्षीय मनहेर तारम बताते हैं,
“दो हफ्ते से चारपहिया वाहन चलाना सीख रहा हूं। ट्रेनर हमें धैर्य से हर चीज सिखा रहे हैं — स्टेयरिंग पकड़ने से लेकर ब्रेक और क्लच तक। ड्राइविंग सीखने की इच्छा अब पूरी हो रही है।”
इसी तरह नरसिंह नेताम भी फोरव्हीलर ड्राइविंग सीखकर अपने भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
19 वर्षीय सुकदू पद्दा कहते हैं,
“मैं निरक्षर हूं, लेकिन यहां तीन महीने से पढ़ाई और काम का प्रशिक्षण ले रहा हूं। अब लगता है कि मैं भी कुछ कर सकता हूं।”
वहीं 19 वर्षीय काजल वेड़दा बताती हैं,
“बचपन से सिलाई सीखने का सपना था। यहां आकर वह पूरा हो रहा है। साथ ही पढ़ाई भी कर रही हूं, जिससे खुद पर भरोसा बढ़ा है।”
जगदेव कोमरा, राजू नुरूटी, बीरसिंह मण्डावी, मैनू नेगी, सनऊ गावड़े, मानकी नेताम, सामको नुरूटी, उंगी कोर्राम, रमोती कवाची, मानकेर हुपेंडी, डाली सलाम, गेंजो हुपेंडी सहित सभी प्रतिभागी अपनी रुचि के अनुसार प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
स्वास्थ्य, शिक्षा और मनोरंजन का भी ध्यान
कैंप में स्वास्थ्य विभाग की टीम नियमित जांच कर दवाइयां उपलब्ध कराती है। साथ ही कैरम, खेलकूद और वाद्य यंत्र जैसी गतिविधियों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास को भी मजबूत किया जा रहा है।
भविष्य की तैयारी
पुनर्वास कैंप के नोडल
अधिकारी विनोद अहिरवार ने बताया कि कलेक्टर उत्तर बस्तर कांकेर के निर्देशानुसार सभी आत्मसमर्पित माओवादियों को चरणबद्ध रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है। आने वाले समय में मशरूम उत्पादन, बागवानी और अन्य स्वरोजगार मूलक प्रशिक्षण भी शुरू किए जाएंगे।
राज्य सरकार का यह प्रयास न केवल हिंसा छोड़ चुके लोगों को सम्मानजनक जीवन देने की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि समाज में विश्वास, शांति और पुनर्निर्माण की भावना को भी सशक्त करता है।

