लोकसभा में खुलासा: एमएसएमई समाधान पोर्टल पर 2.56 लाख आवेदन, 61% मामलों का निपटारा — छत्तीसगढ़ से राइस मिलिंग के 19 केस

लोकसभा में खुलासा: एमएसएमई समाधान पोर्टल पर 2.56 लाख आवेदन, 61% मामलों का निपटारा — छत्तीसगढ़ से राइस मिलिंग के 19 केस

लोकसभा में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय से जुड़े बतारांकित प्रश्न संख्या 2139 के जवाब में राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने एमएसएमई समाधान पोर्टल पर लंबित और निपटाए गए मामलों की विस्तृत जानकारी दी।

61% मामलों का निपटान
मंत्री ने बताया कि MSME Samadhaan Portal पर अब तक सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों द्वारा 2,56,892 आवेदन दायर किए गए हैं।

इनमें से 1,57,997 मामलों का निपटारा किया जा चुका है।

यानी दर्ज मामलों की तुलना में निपटान का अनुपात लगभग 0.61 (61%) है।

देरी के प्रमुख कारण
मंत्रालय के अनुसार शुरुआती चरण में मामलों के लंबित रहने की मुख्य वजहें हैं:

अधूरे आवेदन और दस्तावेजों की कमी

पात्रता और दावे के सत्यापन में समय

उद्यम पंजीकरण प्रमाणपत्र (URC/Udyam) विवाद
खरीदार पक्ष से जवाब आने में देरी

परिषदों की सीमित प्रशासनिक क्षमता और अधिक कार्यभार
15 अक्टूबर 2025 से नए मामले नए ऑनलाइन विवाद समाधान प्लेटफॉर्म MSME ODR Portal पर दर्ज किए जा रहे हैं।

कलेक्टरों को भेजे गए मामलों का डेटा नहीं

सरकार ने स्पष्ट किया कि जिला कलेक्टरों को भू-राजस्व बकाया की तरह वसूली हेतु भेजे गए मामलों के निष्पादन का अलग से कोई केंद्रीकृत डेटा मंत्रालय के पास उपलब्ध नहीं है।

राज्यवार आंकड़े

30 अक्टूबर 2017 से पोर्टल शुरू होने के बाद देशभर के राज्य-वार आंकड़े संकलित किए गए हैं (विस्तृत सूची अनुबंध-1 में)।

छत्तीसगढ़ में राइस मिलिंग के 19 आवेदन

उद्योग निदेशालय से मिली जानकारी के अनुसार
छत्तीसगढ़ में राइस मिलिंग
(NIC 2008 – 10612) श्रेणी के तहत 19 आवेदन दर्ज हुए हैं — यानी चावल मिल मालिकों द्वारा भुगतान विवाद के मामले।

समय सीमा पालन के लिए कदम

राज्यों को परिषदों की नियमित बैठकें करने और संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

विश्व बैंक सहायता प्राप्त RAMP योजना के तहत परिषदों को:

कानूनी व सचिवालय स्टाफ
आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर
मुहैया कराया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ में भी मॉनिटरिंग, कॉज-लिस्ट, ट्रैकिंग, पुराने मामलों को प्राथमिकता और नोटिस व्यवस्था जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।

दिवालियापन मामलों में एमएसएमई की सुरक्षा
सरकार ने बताया कि दिवालियापन और दिवालियापन संहिता, 2016 के तहत एमएसएमई को “ऑपरेशनल क्रेडिटर” माना गया है, जिससे दिवालिया होने वाले खरीदारों के मामलों में उनके बकाया दावे सुरक्षित रखने की कानूनी व्यवस्था उपलब्ध है।

सार:

सरकार के अनुसार समाधान पोर्टल ने भुगतान विवादों के निपटान में प्रगति दिखाई है, लेकिन दस्तावेजी कमी, खरीदारों की देरी और परिषदों की क्षमता अभी भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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