बजट 2026-27 पर अर्थशास्त्री प्रभात पटनायक की तीखी टिप्पणी

बजट 2026-27 पर अर्थशास्त्री प्रभात पटनायक की तीखी टिप्पणी

अर्थशास्त्री प्रभात पटनायक ने बजट 2026 -27 को विकृत आर्थिक रणनीति करार देते हुए कहा कि सरकार देश की असली समस्याओं बढ़ती असमानता गरीबी और बेरोजगारी को हल करने के बजाय उल्टी दिशा में कदम उठा रही है।उनके अनुसार बजट में कर नीतियों के असर का स्पष्ट अनुमान तक नहीं दिया गया, जबकि कुल कर-राजस्व का जीडीपी अनुपात घटकर 11.2% रहने का अनुमान है और राजकोषीय घाटा कम करने पर जोर बरकरार है।

पटनायक का तर्क है कि अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए आम लोगों के हाथों में क्रय शक्ति बढ़ाना जरूरी है लेकिन सरकार ने अमीरों पर कर बढ़ाने या सामाजिक हस्तांतरण बढ़ाने के बजाय ढांचागत पूंजी व्यय पर जोर दिया है जो अपेक्षाकृत कम रोजगार पैदा करता है। उन्होंने राज्यों के साथ योजनाओं की फंडिंग हिस्सेदारी बदलने को संसाधनों का केंद्रीकरण बताया।

लेख में कहा गया कि निजी निवेश कर रियायतों से नहीं, मांग बढ़ने से आता है। इसलिए कॉरपोरेट रियायतें कारगर नहीं होंगी। खाद्यान्न योजना समाप्ति और असमान व्यापार समझौतों से ग्रामीण संकट बढ़ने की आशंका भी जताई गई है।

पटनायक के मुताबिक यह बजट बेरोजगारी और गरीबी कम करने के बजाय हालात और बिगाड़ सकता है।

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