8 मार्च को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि महिलाओं के संघर्ष, साहस और अधिकारों की लंबी लड़ाई का प्रतीक भी है। वर्ष 1910 में जर्मनी की समाजवादी नेता Clara Zetkin ने डेनमार्क के कोपेनहेगन में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था। यह प्रस्ताव मजदूरों और महिलाओं पर हो रहे पूंजीवादी दमन के खिलाफ उठती आवाज का प्रतीक था।
इसी दौर में छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में भी महिलाओं ने संघर्ष की एक मिसाल पेश की। Bhumkal Rebellion के दौरान आदिवासी महिलाओं ने अपने बलिदान से इतिहास रचा और बस्तर की धरती को अपने साहस और शहादत से लाल कर दिया।
इतिहास गवाह है कि मजदूर आंदोलनों, नागरिक अधिकारों की लड़ाई और आदिवासी अस्मिता की रक्षा में महिलाओं की भूमिका हमेशा अग्रणी रही है। वर्ष 1920 के जंगल सत्याग्रह के दौरान ब्रिटिश हुकूमत से टक्कर लेते हुए बादराटोला के आदिवासी युवक रामाधीन गोंड के साथ गांव की महिलाओं ने भी मोर्चा संभाला और घायल रामाधीन को अपनी गोद में उठाकर गांव तक पहुंचाया।
छुईखदान में 9 फरवरी 1953 को सरकारी कोषालय के स्थानांतरण के विरोध में महिलाओं ने पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष किया। उस गोलीकांड में द्वारका प्रसाद तिवारी और बैकुंठ प्रसाद तिवारी के साथ समसीरबाई, भूलिनबाई और कचराबाई ने भी शहादत दी।
वहीं रायगढ़ में मिल मजदूरों की लड़ाई के दौरान हीराबाई साहू ने 28 दिन का आमरण अनशन कर श्रमिक आंदोलन को नई दिशा दी। बीबीसी तक ने उनके साहस की गूंज दुनिया भर में सुनाई। इसके बाद 26 जनवरी 1998 को केलो नदी के पानी की मांग को लेकर अनशन कर रहीं सत्यभामा की शहादत भी संघर्ष की मिसाल बन गई।
दल्लीराजहरा की खदानों में 1977 में हुई पुलिस गोलीबारी में भी महिला मजदूरों ने सबसे आगे रहकर विरोध किया, जिसमें यूनियन की प्रमुख अनुसुइया बाई सहित कई मजदूर शहीद हुए।
इतिहास के कई ऐसे मोड़ हैं, जहां महिलाओं ने अन्याय और दमन के खिलाफ डटकर मुकाबला किया। चाहे राजनांदगांव के बीएनसी मिल मजदूरों का आंदोलन हो या भिलाई में रेल पटरी पर बैठकर किया गया सत्याग्रह—हर जगह महिला शक्ति ने अपने साहस और जज्बे का परिचय दिया।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हमें याद दिलाता है कि दमन और अत्याचार चाहे जितना भी हो, एकता और संघर्ष की भावना अंततः जीत की राह बनाती है। महिलाओं की यह विरासत आज भी समाज को प्रेरित कर रही है और आगे भी करती रहेगी।

