ईडी की प्रेस रिलीज़ मे बताया भारतमाला योजना के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम हाईवे परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण में हुए कथित मुआवजा घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छत्तीसगढ़ में बड़ी कार्रवाई की है। ED के रायपुर जोनल कार्यालय ने सोमवार 28 अप्रैल को पीएमएलए 2002 की धारा 17 के तहत अभनपुर, रायपुर, धमतरी और कुरूद स्थित कुल 8 ठिकानों पर एक साथ सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान टीम ने 66 लाख 90 हजार रुपये नकद, 37.13 किलो चांदी की सिल्लियां व अन्य चांदी के सामान, डिजिटल डिवाइस तथा कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए हैं।
ED की यह जांच ACB/EOW रायपुर द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू की गई थी। FIR में तत्कालीन एसडीओ (राजस्व) अभनपुर निर्भय साहू समेत अन्य लोगों पर सरकारी अधिकारियों से मिलीभगत कर जमीन अधिग्रहण के मुआवजे में भारी अनियमितता करने का आरोप है। जांच एजेंसी के मुताबिक आरोपियों ने सरकारी भू-अभिलेखों में हेरफेर, फर्जीवाड़ा और खसरा रिकॉर्ड में बदलाव कर अवैध तरीके से अधिक मुआवजा हासिल किया।
ED जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद भी जमीनों का मालिकाना हक जानबूझकर बदला गया। इतना ही नहीं, अधिसूचना से पहले बड़े भू-खंडों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर रिकॉर्ड में बदलाव किया गया, ताकि अधिक लोगों के नाम पर ज्यादा मुआवजा स्वीकृत कराया जा सके। बाद में संशोधित और छेड़छाड़ किए गए खसरा रिकॉर्ड के आधार पर करोड़ों रुपये का फर्जी भुगतान किया गया। ED ने इसे ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ बताते हुए सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान और आरोपियों को अवैध लाभ पहुंचाने की बात कही है।
सूत्रों के अनुसार छापेमारी के दौरान कई डिजिटल साक्ष्य, वित्तीय लेनदेन से जुड़े कागजात, रसीदें और संदिग्ध दस्तावेज भी मिले हैं, जिनकी अब फॉरेंसिक जांच की जाएगी। एजेंसी का मानना है कि इस पूरे नेटवर्क में राजस्व विभाग के कुछ अधिकारी, बिचौलिए और लाभार्थी शामिल हैं, जिन्होंने सुनियोजित साजिश के तहत सरकारी मुआवजा राशि में बड़ा खेल किया।

