छत्तीसगढ़ में ‘साड़ी कांड’ से हड़कंप, 9.7 करोड़ की योजना पर सवाल; बाल अधिकारों के लिए ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम की तैयारी

छत्तीसगढ़ में ‘साड़ी कांड’ से हड़कंप, 9.7 करोड़ की योजना पर सवाल; बाल अधिकारों के लिए ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम की तैयारी

छत्तीसगढ़ के महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को वितरित साड़ियों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। करीब 9.7 करोड़ रुपये की इस योजना में गुणवत्ता और लंबाई को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं। बताया जा रहा है कि 1.94 लाख महिलाओं को दी गई साड़ियों में तय मानक 5.5 मीटर के बजाय केवल 5 मीटर कपड़ा पाया गया, जिससे पूरे मामले में कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार की आशंका गहरा गई है।

सूत्रों के मुताबिक, 500 रुपये प्रति साड़ी की इस खरीद में बड़े स्तर पर मुनाफे का खेल हुआ, जिसमें कथित तौर पर प्रभावशाली लोगों और अधिकारियों के बीच हिस्सेदारी तय थी। अब जब मामला तूल पकड़ चुका है, विभाग ने साड़ियों को वापस मंगाने का आदेश जारी कर दिया है।

अंदरखाने से मिल रही जानकारी के अनुसार, इस पूरे “साड़ी कांड” में एक संगठित सिंडिकेट के काम करने की बात सामने आ रही है, जिससे सत्ता के गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

बाल अधिकारों के लिए ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम की पहल
इधर, बच्चों के अधिकारों के संरक्षण को मजबूत करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने “रक्षक” नामक एक वर्षीय विशेष पाठ्यक्रम शुरू करने की अनुशंसा की है। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को बाल अधिकारों के क्षेत्र में प्रशिक्षित कर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।

यह पाठ्यक्रम स्नातक योग्यता रखने वाले विद्यार्थियों के लिए होगा और सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर “पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (PGDPCR)” की उपाधि दी जाएगी। कोर्स की अवधि एक वर्ष होगी, जिसमें दो सेमेस्टर शामिल रहेंगे।

पाठ्यक्रम में बाल अधिकारों की पृष्ठभूमि, किशोर न्याय अधिनियम 2015, बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005, बालश्रम व बाल विवाह रोकथाम, POCSO एक्ट 2012, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009, तथा दत्तक ग्रहण प्रक्रिया जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल किए गए हैं। साथ ही, फील्ड वर्क, केस स्टडी और प्रायोगिक प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को वास्तविक परिस्थितियों से भी जोड़ा जाएगा।

आयोग का मानना है कि इस पाठ्यक्रम के जरिए प्रशिक्षित युवा बाल संरक्षण इकाइयों और स्वयंसेवी संस्थाओं में प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए जमीनी स्तर पर काम कर पाएंगे।

एक ओर जहां साड़ी वितरण में कथित भ्रष्टाचार ने सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं दूसरी ओर “रक्षक” जैसे पाठ्यक्रम की पहल बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में सकारात्मक कदम मानी जा रही है।

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