छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पांचवें और आखिरी दिन करीब 14 घंटे 30 मिनट चली चर्चा के बाद साय सरकार के खिलाफ कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से गिर गया। जवाब देते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह सरकार नहीं, तीन करोड़ छत्तीसगढ़वासियों के जनादेश के खिलाफ लाया गया प्रस्ताव है।
उन्होंने दावा किया कि अगला विधानसभा चुनाव भी भाजपा जीतेगी और इस बार 70 से ज्यादा सीटें आएंगी, जबकि कांग्रेस अगले 25 साल तक सत्ता में नहीं लौटेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी किसान का बेटा मुख्यमंत्री बना है, यही बात कांग्रेस को पच नहीं रही। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर घोटालों, वादाखिलाफी और दिल्ली का ‘ATM’ बनने का आरोप भी लगाया।
चर्चा में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार पर किसानों, खाद संकट, धान खरीदी, कानून-व्यवस्था, महतारी वंदन, राशन, स्वास्थ्य और आदिवासी मुद्दों पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को ठग रही है, खाद की किल्लत है, धान खरीदी व्यवस्था फेल है और कानून-व्यवस्था बिगड़ चुकी है।
सदन में चर्चा के दौरान नेताओं की बड़ी बातें
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान हसदेव अरण्य का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पर्यावरण की अनदेखी कर कोयला खनन और पेड़ों की कटाई को बढ़ावा दिया।
महंत ने कहा कि 91 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन की अनुमति से करीब 15 हजार पेड़ों की कटाई होगी। उन्होंने हसदेव को ‘मध्य भारत के फेफड़े’ बताते हुए कहा कि सरकार उद्योगपतियों के लिए जंगलों और छत्तीसगढ़ की अस्मिता से समझौता कर रही है।
महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध पर उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध, बलौदाबाजार हिंसा और कानून-व्यवस्था पर सरकार को घेरा। उन्होंने कृषि की उपेक्षा, बेरोजगारी भत्ता बंद करने, किसानों के धान नहीं बिकने, पेसा कानून, आदिवासी जमीन, अबूझमाड़ में पेड़ कटाई, भारतमाला परियोजना और आबकारी विभाग में कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे भी उठाए।
सामूहिक विवाह में नकली मंगलसूत्र का मामला सदन में गूंजा
कांग्रेस विधायक अनिला भेड़िया ने सामूहिक विवाह में नकली मंगलसूत्र देने और एजेंसी पर कार्रवाई नहीं होने का मुद्दा उठाया। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि बालोद से ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है, इसलिए कार्रवाई का सवाल नहीं है।
भूपेश सरकार में भी लाया गया था अविश्वास प्रस्ताव
प्रदेश में भूपेश बघेल (कांग्रेस) की पूर्ववर्ती सरकार के खिलाफ छत्तीसगढ़ विधानसभा में दो बार 2022 और 2023 में अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। 2022 में अविश्वास प्रस्ताव पर 12 घंटे 32 मिनट चर्चा चली थी।
जबकि जुलाई 2023 के मानसून सत्र के दौरान बीजेपी ने सरकार के खिलाफ 109 बिंदुओं का आरोप-पत्र पेश किया था। हालांकि, भारी बहुमत (कांग्रेस के 72 विधायक) के कारण यह प्रस्ताव विधानसभा में ध्वनिमत से गिर गया था ।

