आस्था, कला और इंसानियत जब एक साथ मिलती हैं, तो वह समाज के लिए प्रेरणा बन जाती है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के रहने वाले राम विलास नामदेव इसकी एक खूबसूरत मिसाल हैं। वे पिछले करीब 30 वर्षों से मस्जिदों में कुरआन शरीफ की पवित्र आयतों की आकर्षक अरबी कैलीग्राफी (खूबसूरत लिखावट) कर रहे हैं।
खास बात यह है कि राम विलास नामदेव ने इस कला को सीखने के लिए उर्दू और अरबी भाषा का अध्ययन किया। इसके बाद उन्होंने अपनी मेहनत, लगन और हुनर के दम पर कुरआन शरीफ की आयतों को बेहद खूबसूरत अंदाज में लिखने की कला में महारत हासिल की। उनकी बनाई गई कैलीग्राफी मस्जिदों की दीवारों की खूबसूरती बढ़ाने के साथ-साथ देखने वालों को भी आकर्षित करती है।
राम विलास नामदेव की इस पहल की सबसे बड़ी खूबसूरती उनका सेवा भाव है। उन्होंने कई स्थानों पर बिना किसी शुल्क के यह काम करके सामाजिक सद्भाव और आपसी भाईचारे का संदेश दिया है।
आज जब समाज में धर्म और जाति के नाम पर दूरियां देखने को मिलती हैं, ऐसे समय में राम विलास नामदेव का यह समर्पण बताता है कि कला की कोई सीमा नहीं होती और इंसानियत किसी एक धर्म की मोहताज नहीं होती।
तीन दशकों से लगातार जारी उनका यह प्रयास केवल एक कला नहीं, बल्कि आपसी सम्मान, प्रेम और गंगा-जमुनी तहजीब की जीवंत मिसाल है। राम विलास नामदेव जैसे लोग अपने कर्मों से समाज को जोड़ने और इंसानियत का संदेश देने का काम करते हैं। निश्चित ही उनका यह अनूठा योगदान सम्मान और सराहना का हकदार है।

