छत्तीसगढ़ कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं है। युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष चुनाव ने पार्टी की अंदरूनी खींचतान को खुलकर सामने ला दिया है। शुरुआती रेफरल आंकड़ों में जिस तरह से देवेंद्र यादव समर्थित पैनल बढ़त बनाता दिख रहा है, उसने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल खेमे की चिंता बढ़ा दी है।
सूत्रों के मुताबिक रेफरल प्रक्रिया में शैलेन्द्र बंजारे 317 रेफरल के साथ सबसे आगे बताए जा रहे हैं। वहीं प्रशांत बोकड़े (224) और सोनू शर्मा (221) भी मजबूत स्थिति में हैं। दूसरी तरफ भूपेश बघेल समर्थित माने जा रहे विनय शील 192 रेफरल के साथ पीछे नजर आ रहे हैं। इससे कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
महंत-सिंहदेव का झुकाव देवेंद्र यादव खेमे की ओर?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नेता प्रतिपक्ष Charan Das Mahant और वरिष्ठ कांग्रेस नेता T. S. Singh Deo के समर्थकों का झुकाव देवेंद्र यादव पैनल की ओर है। यदि यह समीकरण मतदान तक कायम रहता है तो चुनावी तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।
भाजपा का हमला: ‘भूपेश का नेतृत्व स्वीकार नहीं’
मामले पर भाजपा ने कांग्रेस को घेरने का मौका नहीं छोड़ा। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता दाऊ अनुराग अग्रवाल ने दावा किया कि युवा कांग्रेस का चुनाव अब संगठनात्मक प्रक्रिया कम और गुटबाजी की लड़ाई ज्यादा बन गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के भीतर कई नेता अब Bhupesh Baghel का नेतृत्व स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं और अलग शक्ति केंद्र उभर रहे हैं।
युवा कांग्रेस चुनाव बना शक्ति प्रदर्शन
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव केवल युवा कांग्रेस अध्यक्ष चुनने का नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर भविष्य के नेतृत्व की दिशा तय करने वाला मुकाबला बनता जा रहा है। एक ओर भूपेश बघेल खेमे की प्रतिष्ठा दांव पर है, तो दूसरी ओर देवेंद्र यादव समर्थित गुट अपनी ताकत दिखाने में जुटा है।
बड़ा सवाल
क्या युवा कांग्रेस चुनाव छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नए नेतृत्व के उभार का संकेत है?
क्या भूपेश बघेल की पकड़ पहले जैसी मजबूत नहीं रही?
या फिर अंतिम चरण में समीकरण बदल जाएंगे?
फिलहाल कांग्रेस के भीतर चल रही यह सियासी जंग आने वाले दिनों में और दिलचस्प होने वाली है।

