हूती विद्रोहियों की बढ़त से सऊदी अरब की बढ़ी चिंता, बाब अल-मंदेब पर नियंत्रण की जंग तेज

हूती विद्रोहियों की बढ़त से सऊदी अरब की बढ़ी चिंता, बाब अल-मंदेब पर नियंत्रण की जंग तेज

यमन में हूती विद्रोहियों की हालिया सैन्य बढ़त ने सऊदी अरब की सुरक्षा और आर्थिक हितों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। सितंबर की शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के वफादार बल हूती विद्रोहियों के औचक हमलों के सामने टिक नहीं सके, जिसके बाद लाल सागर तट के बड़े हिस्से पर हूती नियंत्रण मजबूत हो गया।


हूती लड़ाकों ने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास के रणनीतिक क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। यह जलमार्ग लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ता है तथा सऊदी अरब के तेल निर्यात और वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ी अनिश्चितता के बाद इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ गई है।


इस बीच सऊदी अरब के शहरों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाएं भी बढ़ी हैं। सऊदी अधिकारियों का आरोप है कि हूती विद्रोहियों को ईरान समर्थित समूहों का समर्थन प्राप्त है। हालांकि ईरान इन आरोपों को खारिज करते हुए अपने समर्थन को केवल राजनीतिक बताता रहा है।


विशेषज्ञों का मानना है कि हूती संगठन अब केवल एक स्थानीय विद्रोही समूह नहीं रह गया है, बल्कि वह आधुनिक तकनीक, ड्रोन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग कर अपनी सैन्य और रणनीतिक क्षमता को मजबूत कर रहा है। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की शोधकर्ता डॉ. एलिज़ाबेथ केंडल के अनुसार, हूती आंदोलन अब अधिक संगठित, अनुशासित और तकनीकी रूप से सक्षम हो चुका है।


यमन में 2015 से शुरू हुए संघर्ष ने भारी मानवीय संकट पैदा किया है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, इस युद्ध में लगभग डेढ़ लाख लोगों की जान जा चुकी है, जबकि लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। देश की बड़ी आबादी आज भी मानवीय सहायता पर निर्भर है।


विश्लेषकों का कहना है कि सऊदी अरब के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सैन्य कार्रवाई के परिणाम अनिश्चित हैं और क्षेत्रीय परिस्थितियां किसी बड़े हस्तक्षेप को बेहद कठिन बना रही हैं। ऐसे में बाब अल-मंदेब क्षेत्र में हूती प्रभाव बढ़ने से न केवल यमन बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति पर असर पड़ सकता है।

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