छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत प्रवेश प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। निजी स्कूलों में आरटीई के तहत दाखिलों को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि जब नया शैक्षणिक सत्र अप्रैल से शुरू हो चुका है, तब अगस्त तक प्रवेश प्रक्रिया जारी रहने से गरीब बच्चों की पढ़ाई कैसे पूरी होगी और उनके लिए क्या विशेष व्यवस्था की गई है।
राज्य सरकार ने अदालत में दायर शपथ पत्र में बताया कि आरटीई प्रवेश प्रक्रिया अगस्त तक चलेगी। वहीं सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दूसरे चरण की लॉटरी के बाद 9,984 रिक्त सीटों के लिए 1,174 छात्रों का चयन किया गया है।
दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने शिक्षा विभाग की नीतियों को दाखिलों में भारी गिरावट का कारण बताया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता के अनुसार, पहले हर वर्ष करीब 80 हजार बच्चों को आरटीई के तहत प्रवेश मिलता था, लेकिन इस वर्ष यह संख्या घटकर लगभग 22 हजार रह गई है। उनका दावा है कि “एंट्री क्लास” संबंधी नियमों में बदलाव के कारण करीब 60 हजार गरीब बच्चे मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर से वंचित हो गए हैं।
मामला फिलहाल हाईकोर्ट में लंबित है और अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

