“राजधानी में सैकड़ों रग्बी खिलाड़ी बिना अपने मैदान के अभ्यास को मजबूर”

“राजधानी में सैकड़ों रग्बी खिलाड़ी बिना अपने मैदान के अभ्यास को मजबूर”

सुबह 7 बजे से राजधानी रायपुर के एक सामान्य मैदान में छत्तीसगढ़ के रग्बी खिलाड़ी पसीना बहा रहे हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके इस खेल के खिलाड़ी आज भी अपने स्थायी मैदान और बुनियादी सुविधाओं के इंतजार में हैं। तस्वीर में दिख रहा यह दृश्य सिर्फ अभ्यास नहीं, बल्कि खेल व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल है।

रग्बी भारत में मान्यता प्राप्त खेल है और भारतीय रग्बी फुटबॉल संघ (Rugby India) देशभर में प्रतियोगिताएं और राष्ट्रीय चैंपियनशिप आयोजित करता है। छत्तीसगढ़ की राज्य इकाई भी इससे संबद्ध है।

सवाल यह है कि जब क्रिकेट, फुटबॉल और अन्य खेलों के लिए करोड़ों रुपये के स्टेडियम और सुविधाएं उपलब्ध हैं, तब छत्तीसगढ़ में सैकड़ों रग्बी खिलाड़ियों को आज भी अपने स्थायी मैदान के लिए संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है? आखिर खेल बजट कुछ चुनिंदा खेलों तक ही सीमित क्यों दिखाई देता है?

राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ी खुले मैदानों में अभ्यास करने को मजबूर हैं। न डेडिकेटेड रग्बी ग्राउंड, न नियमित प्रशिक्षण केंद्र और न ही आधुनिक खेल सुविधाएं। इसके बावजूद खिलाड़ी अपने दम पर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

अब बड़ा सवाल शासन, खेल विभाग और खेल संघों से है—
रग्बी खिलाड़ियों को उनका अपना मैदान कब मिलेगा?
कौन है इस स्थिति का जिम्मेदार?
और क्या छत्तीसगढ़ में रग्बी को भी वह पहचान और सुविधाएं मिलेंगी, जिसकी वह हकदार है?

तस्वीर राजधानी रायपुर की है, जहां सैकड़ों खिलाड़ी सीमित संसाधनों के बीच अपने सपनों को जिंदा रखने की कोशिश कर रहे हैं।

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