भारतीय डाक कर्मचारी महासंघ ने कर्मचारियों की विभिन्न मांगों को लेकर देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। महासंघ ने आरोप लगाया है कि डाक विभाग में कर्मचारियों और ग्रामीण डाक सेवकों (GDS) पर टारगेट का अत्यधिक दबाव डाला जा रहा है, जिससे उनका शोषण हो रहा है। संगठन का कहना है कि कई कर्मचारी अपने वेतन से खाते खुलवाकर लक्ष्य पूरा करने को मजबूर हैं।
महासंघ द्वारा जारी आंदोलन कार्यक्रम के अनुसार 20 से 27 जुलाई 2026 तक कर्मचारी कार्यालयों में काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे। 28 जुलाई को लंच अवकाश के दौरान मंडलीय कार्यालयों के सामने प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद 5 अगस्त को एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल और 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की घोषणा की गई है।
संगठन की प्रमुख मांगों में टारगेट आधारित कार्य संस्कृति समाप्त करना, रेल डाक सेवा के अनुभागों को पुनः शुरू करना, मेल मोटर सेवा और अन्य शाखाओं के रिक्त पदों पर भर्ती, भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई, कैडर पुनर्गठन, भूतपूर्व सैनिक कर्मचारियों की वेतन विसंगति दूर करना तथा मृतक आश्रितों को रिक्त पदों पर समायोजित करना शामिल है।
इसके अलावा महासंघ ने पुराने डिलीवरी सिस्टम को बहाल करने और भगवान विश्वकर्मा जयंती (17 सितंबर) को राष्ट्रीय श्रम दिवस घोषित करने की मांग भी उठाई है।
महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और विभाग ने मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी विभाग और केंद्र सरकार की होगी।

