छत्तीसगढ़। वनांचल और आदिवासी अंचलों में सामुदायिक नेतृत्व आधारित विकास की मजबूत नींव तैयार करने में जुटी खोज एवं जन जागृति समिति (KHOJ) आज छत्तीसगढ़ में जंगल, जीवन और जीविका के संरक्षण का सशक्त मॉडल बनकर उभर रही है।
समुदाय केंद्रित सोच के साथ कार्यरत यह सामाजिक विकास संस्था वन-निर्भर, आदिवासी और सामाजिक रूप से वंचित समुदायों के बीच गरिमा, आत्मनिर्भरता और स्थिरता को स्थापित करने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
संस्था का मुख्य उद्देश्य स्थानीय समुदायों को उनके प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार, संरक्षण और बेहतर प्रबंधन के लिए सक्षम बनाना है।
सहभागितापूर्ण कार्यशैली के जरिए KHOJ स्थानीय नेतृत्व को विकसित करते हुए प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, पारिस्थितिक संरक्षण, पर्यावरणीय सततता और सामाजिक समावेशन के अनुरूप विकास समाधान तैयार कर रही है।
विशेष रूप से कमार सहित आर्थिक रूप से कमजोर जनजातीय परिवारों के बीच संस्था ने स्थापना के बाद से महानदी, पैरी, सोंढूर और खारुन बेसिन के वन क्षेत्रों में व्यापक कार्य किया है। संस्था की दीर्घकालिक भागीदारी से ऐसे स्थानीय मॉडल सामने आए हैं जिनमें आजीविका संवर्धन, सामुदायिक शासन और पारिस्थितिक संरक्षण का संतुलित समावेश देखने को मिलता है।
KHOJ की दृष्टि एक ऐसे समावेशी और सहिष्णु समाज के निर्माण की है, जहाँ वन-निर्भर समुदाय गरिमा और सामाजिक सौहार्द के साथ आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।
वहीं संस्था का मिशन सामुदायिक संस्थाओं को मजबूत करना, वन आधारित जलवायु अनुकूल आजीविकाओं को बढ़ावा देना और बहु-हितधारक सहयोग के माध्यम से न्यायपूर्ण एवं सतत विकास सुनिश्चित करना है।
“समुदाय केंद्र में, जंगल सुरक्षित हाथों में” की अवधारणा के साथ KHOJ छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और वन क्षेत्रों में स्थानीय संस्थाओं, सामूहिक नेतृत्व और स्थायी प्रभाव की नई इबारत लिख रही है। यह संस्था साबित कर रही है कि जब विकास की धुरी समुदाय होता है, तब जंगल भी सुरक्षित रहते हैं और जीवन-जीविका भी मजबूत होती है।

