प्रख्यात शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक एक बार फिर देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर चर्चा में हैं। वांगचुक का कहना है कि भारत के करोड़ों बच्चों का भविष्य वर्तमान शिक्षा प्रणाली की खामियों के कारण प्रभावित हो रहा है और अब बदलाव की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।
हाल के दिनों में उन्होंने परीक्षा अनियमितताओं, पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी और सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति जैसे मुद्दों को उठाते हुए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग की है। वांगचुक का मानना है कि केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करना भी जरूरी है।
लंबे समय से शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे वांगचुक ने कहा है कि बच्चों का भविष्य किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी है और यदि शिक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं होगी तो विकसित भारत का सपना अधूरा रह जाएगा। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण और समान शिक्षा को देश के विकास की बुनियाद बताया है।
“बच्चों के भविष्य के लिए संघर्ष: शिक्षा सुधार की मांग को लेकर सोनम वांगचुक ने दांव पर लगाई अपनी जिंदगी”

