लोकसभा में नहीं पास हुआ 131वां संविधान संशोधन विधेयक, सरकार बोली-महिलाओं को अधिकार दिलाकर रहेंगे

लोकसभा में नहीं पास हुआ 131वां संविधान संशोधन विधेयक, सरकार बोली-महिलाओं को अधिकार दिलाकर रहेंगे

लोकसभा में शुक्रवार को संविधान में 131वां संशोधन बिल वोटिंग के बाद गिर गया. यह बिल महिला आरक्षण क़ानून में संशोधन के लिए लाया गया था.

एनडीए बिल के पक्ष में दो तिहाई वोट हासिल करने में नाकाम रहा. बिल के पक्ष में 298 वोट मिले जबकि इसके विरोध में 230 वोट मिले.

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि बाकी दोनों संशोधन बिलों को आगे नहीं बढ़ाने का फ़ैसला किया गया है.

संसद में महिलाओं को 33 फ़ीसदी आरक्षण देने वाले क़ानून में संशोधन और डीलिमिटेशन से जुड़े बिलों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच बहस के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब दिया और फिर वोटिंग हुई.

केंद्र सरकार के कानून मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक़, महिला आरक्षण अधिनियम 2023 गुरुवार (16 अप्रैल 2026) से लागू हो चुका था.

क़ानून में संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फ़ीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया है.

लेकिन सरकार के प्रस्तावित संविधान (131वां संशोधन) बिल 2026 में कहा गया है कि सीटों में आरक्षण डीलिमिटेशन के आधार पर लागू होगा.

जबकि सरकार के इस कदम का विरोध करने वालों का कहना था कि 33 फ़ीसदी आरक्षण लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों पर ही देना चाहिए ना कि डीलिमिटेशन के आधार पर बढ़ाई गई सीटों पर.

संविधान संशोधन बिल पर बहस के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण के ख़िलाफ़ है.

उन्होंने कहा, ”इंडी अलायंस के सभी सदस्यों ने अगर-मगर, किंतु-परंतु लगाकर स्पष्ट रूप से महिला आरक्षण का विरोध किया है. कई जगह ऐसा दिखाई पड़ा कि विरोध हमारे दृष्टिकोण की जगह, हमारे लागू करने के तरीके पर है.”

अमित शाह ने कहा, ”बिल का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण है. किसी-किसी संसदीय क्षेत्र में 39 लाख वोटर हैं. ऐसे में एक सांसद कैसे इतने लोगों पर ध्यान देगा.”

”जो सीटें बढ़ाने का विरोध कर रहे हैं, वह ये ध्यान में रखें कि एससी-एसटी की सीटें बढ़ाने का भी विरोध कर रहे हैं. संविधान में परिसीमन का प्रावधान है.”

उन्होंने कहा, “कुछ लोग उत्तर-दक्षिण नैरेटिव गढ़ रहे हैं. वो कह रहे हैं कि दक्षिण भारत की सीटें कम हो जाएंगी. जितना संसद पर किसी और हिस्से का अधिकार है उतना ही दक्षिण भारत का. ये लोग बेकार का नैरेटिव फैला रहे हैं.”
अमित शाह ने कहा, ”विपक्ष के सदस्य यहां हल्ला-हंगामा से बच जाएंगे. लेकिन माता-बहनों के आक्रोश से नहीं बच जाएंगे. जब चुनाव के मैदान में जाएंगे तो रास्ता नहीं मिलेगा.”

अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस ने ओबीसी के साथ भी धोखा किया.

उन्होंने कहा, ”चौधरी चरण सिंह और सीताराम केसरी को कांग्रेस ने काम पूरा नहीं करने दिया.1957 में ओबीसी के लिए आरक्षण के लिए काका कालेलकर कमेटी के सुझावों को ठंडे बस्ते में डाल दिया.”

”1980 में मंडल आयोग के सुझावों को ठंडे बस्ते में डाल दिया. वीपी. सिंह के समय मंडल आयोग की सिफारिशें लागू हुईं.’

उन्होंने कहा, “राजीव गांधी ने अपना लंबा भाषण मंडल आयोग के विरोध में दिया. 1951 और 1971 में जाति जनगणना का विरोध किया. अब कांग्रेस हार रही है तो उसे पिछड़ों की याद आ रही है. कांग्रेस ने एक भी पिछड़ा पीएम नहीं दिया. बीजेपी ने अति पिछड़ा वर्ग के नेता नरेंद्र मोदी को पीएम बनाया

राहुल गांधी ने उठाए ये सवाल

लोकसभा में महिला आरक्षण क़ानून और परिसीमन आयोग से जुड़े बिलों पर लोकसभा में वोटिंग से पहले बहस के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा पहला सच तो ये है कि ये महिला आरक्षण बिल नहीं है.

उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल तो 2023 में पारित हो चुका.

उन्होंने कहा कि ‘ये बिल देश का चुनावी नक्शा बदलने की कोशिश है. यह बिल एससी-एसटी और ओबीसी के ख़िलाफ़ है, उनके अधिकार छीनने का एजेंडा है.’

उन्होंने कहा, “इस बिल का महिला सशक्तिकरण से कोई मतलब नहीं है. आप सत्ता हथियाने की कोशिश में हैं. ये बिल राष्ट्रविरोधी है. हम सरकार को ये नहीं करने देंगे. दक्षिण और उत्तर भारत के साथ भेदभाव हो रहा है. दलित और आदिवासी की भागीदारी कम हो रही है.”

राहुल गांधी ने कहा, “महिलाएं हमारी राष्ट्रीय कल्पना की प्रेरक शक्ति हैं. हम सभी अपनी जिंदगी में महिलाओं से बहुत कुछ सीखा है, प्रभावित हुए हैं और उनसे बहुत ज्ञान हासिल किया है.”

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