बस्तर के घने जंगलों में कभी संघर्ष और असुरक्षा के बीच रहने वाले माओवादी, जो पारिवारिक जीवन और संतान सुख से वंचित थे, अब संतान पाकर बस्तर में नई जिंदगी जी रहे हैं.
माओवादियों की होती थी नसबंदी
दरअसल, माओवादी संगठन में शादी तो होती थी, लेकिन संतान प्राप्ति की मनाही थी. अब नसबंदी से पीड़ित माओवादियों की रिवर्स नसबंदी कराई जा रही है. 27 सरेंडर माओवादियों को संतान सुख भी मिल गया है. वहीं कई माओवादियों ने रिवर्स नसबंदी की इच्छा जाहिर की है.
माओवादी रचते थे घिनौनी साजिश
बस्तर आईजी ने बताया कि माओवादी ये मानते हैं कि बच्चे संगठन के कार्य के लिए बाधा होते हैं. जंगल में उन्हें जीवन बिताने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. जंगल, पहाड़, नदी नालों को पार करने में दिक्कतें होती हैं. वहीं जवानों के ऊपर हमला करने और अन्य नक्सल गतिविधियों को भी करने में बच्चों का होना या महिला माओवादियों का गर्भवती होना संगठन के लिए काफी नुकसानदायक होता है.

